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Sanam Saeed Interview | पाक एक्‍ट्रेस सनम सईद का वायरल हुआ वीडियो; मुस्लिमों को बॉलीवुड में दुश्मन की तरह द‍िखाते हैं


Sanam Saeed

Photo – Instagram

मुंबई : पाकिस्तानी अभिनेत्री (Pakistani Actress) सनम सईद (Sanam Saeed), ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत में पाकिस्तानी कलाकारों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया जाता। सनम पाकिस्तानी शो ‘जिंदगी गुलजार है’ (Zindagi Gulzar Hai) के लिए सबसे ज्यादा जानी जाती हैं। उन्होंने हाल ही में अपने इंटरव्यू में कहा कि लोकप्रिय पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान (fawad Khan) और माहिरा खान (Mahira Khan) पाकिस्तानी कलाकारों पर अनौपचारिक प्रतिबंध लगने से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। एक्ट्रेस का यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। उनकले अनुसार भारत में मुसलमानों को चित्रित करने का एक संक्षेप है जिसमें या तो वह टोपी पहने होते हैं या काजल लगाए।

उन्होंने इसे वलगर कहा, सनम ने कहा, “जब प्रतिबंध अचानक लगा, तो यह थोड़ा अजीब लगा, एक सदमा, भ्रम था। राजनीति को कला और संस्कृति और उस सब के साथ क्यों मिलाया जाए? दुखद, लेकिन साथ ही, अब हम सब इससे उबर गए हैं। यह है जो है। आप इसका मुकाबला नहीं कर सकते… इसका खामियाजा फवाद खान और माहिरा को वाकई भुगतना पड़ा।’ जिस तरह से उनके साथ व्यवहार किया गया, उससे वे घबराए हुए और डरे हुए हैं। यह एक रूप से एक भ्रमित करने वाली जगह है जब एक सेकंड आप वहीं हैं और अगले ही सेकंड आप उसी जगह को पूरी तरह से जाने देते हैं। इसलिए मैं पूरी तरह से समझ सकती हूं कि माहिरा फिर से वह कदम उठाने से क्यों घबरा रही होगी क्योंकि यह उनके लिए एक कठिन डिसीजन होगा।”

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फवाद खान और माहिरा खान अपने नाटक हमसफर के प्रीमियर के बाद भारत में मशहूर हो गए थे। जबकि यह लोग पहले से ही पाकिस्तान में लोकप्रिय थे। फवाद ने बॉलीवुड फिल्म ‘खूबसूरत’ से शुरुआत की और ‘कपूर एंड संस’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में अभिनय किया। माहिरा खान केवल रईस में शाहरुख खान के साथ डेब्यू कर सकी थीं, जिस दौरान भारत में पाकिस्तानी कलाकारों के लिए प्रतिबंध की घोषणा की गई थी। फवाद खान और माहिरा खान को हाल ही में ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ में देखा गया था जो एक ब्लॉकबस्टर पाकिस्तानी फिल्म बन गई थी।

एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि भारतीय फिल्मों में मुस्लिमों को जिस तरह दिखाया जाता है, पाकिस्तानी उसका भी मजाक उड़ाते हैं। “निश्चित रूप से, हम हमेशा इस बात का मजाक उड़ाते हैं कि भारतीय फिल्मों में मुसलमानों को काजल या नमाज की टोपी या पृष्ठभूमि में हरे रंग के साथ ही दिखाया जाता है। कहीं न कहीं यह दिखाने के लिए चित्रित किया जाता है कि यह एक मुस्लिम व्यक्ति या मुस्लिम समुदाय का है और हां, मेरा मतलब है कि यह वैसे बहुत अधिक राजनीतिक हो जाता है लेकिन उन्हें हमेशा दुश्मन के रूप में उजागर किया गया है। मुझे नहीं लगता कि मैंने ऐसी कोई फिल्म देखी है जहां दोनों देश दोस्त हों और एक साथ सहयोग कर रहे हों, इसके विपरीत, वास्तव में जहां सहयोग हर स्तर पर हो रहा है।





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