Type 2 Diabetes: टाइप-2 डायबिटीज को कैसे प्रभावित करता है इंसुलिन, जानें जरूरी बातें &Raquo; Br Breaking News
November 29, 2022
Type 2 Diabetes: टाइप-2 डायबिटीज को कैसे प्रभावित करता है इंसुलिन, जानें जरूरी बातें


Type 2 Diabetes Prevention and Insulin : डायबिटीज की बीमारी कहीं न कहीं आपके चिंता को बढ़ा देती हैं. ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि डायबिटीज से पीड़ित मरीज हर वक्त अपने ब्लड शुगर लेवल को लेकर चिंता में बना रहता है और साथ ही से अपने आहार का चुनाव भी काफी संभल कर करना होता है. मौजूदा समय में डायबिटीज एक आम बीमारी हो गई है लेकिन कुछ समय पहले यह बुजुर्गों में ही पाई जाती थी. अब तो इसके मामले कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल जाते हैं. डायबिटीज दो तरह की होती है पहली टाइप 1 डायबिटीज जबकि दूसरी टाइप 2 डायबिटीज है.

डायबिटी के अधिकांश मामले टाइप 2 डायबिटीज के होते हैं. टाइप-1 डायबिटीज जहां हमें आनुवांशिक तौर पर मिलती है वहीं टाइप 2 डायबिटीज की वजह हमारी खराब जीवनशैली और खराब खानपान है. अनहेल्दी फूड्स के बढ़ते प्रयोग ने टाइप-2 डायबिटीज के मामलों को की गुना बढ़ा दिया है. टाइप 2 डायबिटीज में ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ने लगता है

हमारे शरीर में इंसुलिन का एक महत्वपूर्ण कार्य होता है और इसका टाइप 2 डायबिटीज से भी गहरा संबंध होता है. हेल्थ एक्सपर्ट अक्सर टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन का इजेक्शन देते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर इंसुलिन किस तरह से हमारे शरीर में काम करता है और कैसे यह डायबिटीज को प्रभावित करता है और इंसुलिन थेरेपी का उपयोग कैसे किया जाता है.

स्वास्थ्य के लिए जरूरी है इंसुलिन
इंसुलिन अग्नाशय द्वारा निर्मित एक हार्मोन है. यह हमारे शरीर में भोजन से शर्करा को अलग करता है और ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है. यह ब्लड से ग्लूकोज को हमारे सेल्स तक पहुंचाता जो शरीर को एनर्जी देने में मदद करता है. टाइप 2 डायबिटीज में हमारे सेल्स इंसुलिन से रिएक्ट करना बंद कर देते हैं तो ऐसी अवस्था में इंसुलिन का स्तर बढ़ने लगता है. जब शरीर को इंसुलिन की जरूरत पड़ती है तो अग्नाशय इंसुलिन नहीं भेज पाता. इससे ब्लड में शर्करा का स्तर बहुत अधिक हो जाता है. लंबे समय तक यह समस्या बनी रही तो हमारी नसों, आंखों और दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचने लगता है.

Type 2 Diabetes: शुरुआती स्टेज में ही बड़े संकेत दे देता है टाइप-2 डायबिटीज, जानें इसके स्टेप्स

इंसुलिन थेरेपी आपके रक्त शर्करा को कम करने में मदद कर सकती है
यदि आपको टाइप 2 डायबिटीज है, तो अपने रक्त शर्करा के स्तर को कंट्रोल करना हेल्थ के लिए बहुत आवश्यक है. ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर आपको निम्न सलाह दे सकता है

  • आप अपनी जीवशैली में बदलाव करें.
  • गैर-इंसुलिन इंजेक्शन योग्य दवाएं
  • इंसुलिन थेरेपी का सहारा ले सकते हैं.
  • वजन घटाने वाले व्यायाम करें.

इंसुलिन के प्रकार: जब अग्नाशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता तो आपको इंसुलिन लेने की सलाह दी जाती है. इंसुलिन सामान्यत: दो प्रकार के होते हैं.

  • भोजन के समय लिया जाने वाला इंसुलिन
  • धीमा और लंबा काम करने वाल इंसुलिन. यह इंसुलिन सामान्य तौर पर रात के समय लिया जाता है.

सांस से लिया जाने वाला इंसुलिन
इंसुलिन के कई प्रकार और ब्रांड आते हैं लेकिन अमेरिका में इंसुलिन का एक ब्रांड ऐसा भी है जिसे सांस के माध्यम से लिया जाता है. यह दूसरे प्रकार के इंसुलिन से कहीं अधिक तेजी से काम करता है. यह टाइप 2 मधुमेह वाले सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है.

Type 2 Diabetes: अकेले रहने की आदत बढ़ा सकती है डायबिटीज की समस्या, अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

सभी इंसुलिन इंजेक्ट किए जाते हैं
इनहेलेबल इंसुलिन के अलावा, सभी तरह के इंसुलिन इंजेक्शन द्वारा दिए जाते हैं. इंटरमीडिएट और लंबे समय तक काम करने वाले इंसुलिन को केवल इंजेक्शन के माध्यम से ही लिए जाते हैं. इंसुलिन को कभी भी गोली के रूप में नहीं लिया जा सकता. इंसलिन को हमेशा त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जाता है. इसे आप अपनी जांघ, पेट, बांह में इंजेक्ट कर सकते हैं.

इंसुलिन देने में लग सकता है समय
अगर आपको इंसुलिन थेरेपी सजेस्ट की गई है तो आपको इंसुलिन देने में कुछ समय लग सकता है क्योंकि पहले यह जानना पड़ेगा कि आपको इंसुलिन का कौन का प्रकार देना और उसकी डोज क्या होगी. ब्लड शुगर टेस्ट से आप इस बारे में जानकारी ले सकते हैं. इंसुलिन लेने के बाद आप टेस्ट के माध्यम से यह जान पाएंगे कि इंसुलिन के साथ आप शरीर कैसे रिएक्ट कर रहा है.

इंसुलिन के दुष्प्रभाव
कुछ मामलों में इंसुलिन के शरीर में दुष्प्रभाव भी पड़ सकते हैं. इनमें निम्नलिखित लक्षण शामिल हैं…
ब्लड में शुगर की मात्रा कम होना
वजन का बढ़ना
जहां इंसुलिन इंजेक्ट किया है वहां दर्द या जलन महसूस होना.
इजेक्शन वाली जगह पर संक्रमण का होना
इंजेक्शन वाली जगह पर एलर्जी की समस्या भी हो सकती है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *