December 10, 2022
Postpartum Problems: डिलीवरी के बाद होने वाली ये समस्याएं हो सकती हैं खतरनाक, महिलाएं इन बातों का रखें विशेष ध्यान


हाइलाइट्स

प्रसव के बाद अगर किसी तरह का इंफेक्शन होता है तो तुरंत एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए.
प्रसव के बाद किडनी में संक्रमण, गर्भाशय में संक्रमण का खतरा बना रहता है.

Postpartum Complications: माता पिता बनना इस दुनिया का सबसे सुखद अनुभव है. किसी परुष के लिए यह गर्व का पल होता है लेकिन साथ ही में यह पल उसके जीवन में चुनौतियां और जिम्मेदारियों भी ले आता है. वहीं दूसरी तरफ मां की भी एक अहम भूमिका होती है. मां ही है जो बच्चे को नौ महीने तक अपने गर्भ में रखती है और प्रसव की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरती है. मां पर ही बच्चे की देखभाल और उसके पोषण की जिम्मेदारी होती है. किसी भी महिला के लिए प्रसव काफी चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इससे महिला शारीरिक और मानसिक दोनों तरहे से प्रभावित होती है.

प्रसव के बाद किसी भी महिला को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होता है. ओनली माय हेल्थ के अनुसार प्रसव के बाद महिला को कई तरह की शारीरिक जटिलताएं होने का खतरा भी बना रहता है. कुछ शारीरिक स्थितियां दर्द की तरह सामान्य होती हैं लेकिन कुछ काफी जटिल होती हैं. यदि आप उन स्थितियों के बार में जानते हैं तो आप जरूरत पड़ने पर कारगर कदम उठा सकते हैं लेकिन अगर आप नहीं जानते तो आपको कहीं अधिक परेशानी हो सकती है. कुछ ऐसी स्थितियां हैं जिनके बारे में हर महिला को आवश्यक रूप से पता होना चाहिए.

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होना एक सामान्य बात है लेकिन यह तब तक सामान्य है जब तक यह सीमित मात्रा में हो. अगर अधिक मात्रा में ब्लीडींग हो रही है तो यह एक बड़ी परेशानी हो सकती है. यह स्थिति उन महिलाओं में देखा जाता है जिन्होंने कई बच्चों को जन्म दिया है या ऐसी महिलाएं जिन्होंने लंबे समय तक श्रम किया है. ब्लीडिंग की समस्या उन महिलाओं में भी देखने को मिलती है जिन्हें प्रसव के दौरान या बाद में गर्भाशय में संक्रमण हुआ है.

पोस्टपार्टम इंफेक्शन
प्रसव के बाद इंफेक्शन भी कई बार देखा जाता है. अगर आपको किसी तरह के इंफेक्शन के लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए. यह सिजेरियन या सी-सेक्शन के माध्यम से प्रसव कराने वाली महिलाओं में होने की संभावना होती है. प्रसव के बाद किडनी में संक्रमण, गर्भाशय में संक्रमण और यहां तक ​​कि पेट में संक्रमण भी हो सकते हैं.
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यदि आपको तेज बुखार महसूस होता है, हृदय की गति में वृद्धि होती है या फिर आपको यूरीन में गंध की समस्या होती है तो यह गर्भाशय का संक्रमण हो सकता है. यदि आपको बार बार पेशाब आता है, पीठ में दर्द महसूस होता है और मूत्राशय में भारीपन लगता है तो यह गुर्दे का संक्रमण हो सकता है.

ब्रेस्ट में पेन होना
दूध की नलिकाओं का बंद होना, स्तनों का फूलना और स्तनों में तीव्र खुजली होना प्रसव के बाद स्तन संबंधी कुछ सामान्य समास्याएं उन महिलाओं को हो सकती है जो पहली बार मां बनी हैं. हालांकि इस तरह की जटिलताएं कुछ हफ्तों या फिर एक से दो महीने में ठीक हो जाती हैं.

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यहां पर पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है कि प्रसव के बाद पहले दो से तीन दिन स्तनों से केवल पानी जैसा पदार्थ निकलेगा. जब दूध का स्त्राव शुरू होता है तो तीन से चार दिन बाद स्तन भारी और सख्त हो जाते हैं. स्तनों को मुलायम रखने के लिए महिलाओं को वार्म कंप्रेस का इस्तेमाल करना चाहिए.

प्रसव के बाद अवसाद की समस्या
प्रसव प्रक्रिया एक महिला के जीवन को पूरी तरह से बदल देता है. प्रसव के बाद एक लड़की मां के रूप में आ जाती है. इस परिवर्तन का उस पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है. हालांकि सबसे ज्यादा प्रभाव मानसिक स्तर पर पड़ता है. कई महिलाएं अपने आप को संभाल लेती हैं लेकिन कुछ महिलाओं को इस बदलाव को स्वीकार करने में काफी समय लग जाता है. हालांकि मां बनने की खुशी सभी महिला में होती है लेकिन कई बार महिलाएं अवसाद में चली जाती हैं. ऐसे में परिवार के दूसरे सदस्यों को सतर्क रहने की जरूरत है.

Tags: Health, Lifestyle, Women Health



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