November 27, 2022


Mainpuri Lok Sabha By-Election: यूपी की मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं. इसके अलावा रामपुर और खतौली में विधानसभा का उपचुनाव है. इन चुनावों से बसपा और कांग्रेस ने किनारा कर लिया है. अब सीधे तौर पर मुकाबला सपा बनाम बीजेपी हो गया है. सपा ने मैनपुरी से डिंपल यादव को उतारा है और इस हाईप्रोफाइल सीट को हॉट सीट में तब्दील कर दिया है. बीजेपी अभी किसी चेहरे पर दांव लगाने की दिशा में मंथन कर रही है. मैनपुरी उपचुनाव के लिए 5 दिसंबर को मतदान होगा और 8 दिसंबर को मतगणना होगी.

यूपी की मैनपुरी सीट का जिक्र जब भी आता है तो यादव परिवार की चर्चा होती है. मुलायम सिंह यादव 1996 में इसी सीट से लोकसभा पहुंचे थे. इसके बाद 1998 और 1999 का चुनाव सपा के टिकट पर बलराम यादव ने जीता था. मुलायम सिंह यादव 2004 में एक बार फिर जीते, लेकिन कुछ दिन बाद ही मुख्यमंत्री बनने के कारण मुलायम सिंह यादव ने ये सीट छोड़ दी थी. इसके बाद हुए उपचुनाव में धर्मेंद्र यादव यहां से जीते थे. 

मुलायम सिंह यादव दो सीटों पर जीते
मुलायम सिंह यादव ने 2014 के लोकसभा चुनाव में दो सीट मैनपुरी और आजमगढ़ से चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीट पर जीत हासिल की थी. जिसके बाद मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी सीट छोड़ दी थी, जिस पर हुए उपचुनाव में मुलायम सिंह के पौत्र तेजप्रताप यादव जीते. मुलायम सिंह यादव फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी सीट से जीते. मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी सीट खाली हो गई. 

अब समाजवादी पार्टी के सामने मैनपुरी केवल एक लोकसभा सीट नहीं बल्कि अपने गढ़ को बचाने की चुनौती है. ऐसे में समाजवादी पार्टी परिवार के ही किसी शख्स को यहां से लड़ाने की बात लंबे समय से हो रही थी. तेजप्रताप यादव का नाम इसमें प्रमुखता से लिया जा रहा था, लेकिन गुरुवार को डिंपल यादव का नाम तय कर दिया गया. ऐसे में सपा भारी भरकम जीत का दावा करने से नहीं चूक रही.

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बीजेपी के लिए हो सकती है मुसीबत
बीजेपी के लिए मैनपुरी में जीत हासिल करना एक चुनौती है. इस सीट को यादव कुनबे से बाहर लाने में बीजेपी नाकाम साबित रही है. इस बार मुलायम सिंह यादव के प्रति सहानुभूति की लहर ने रही सही कसर भी पूरी कर दी है. ऐसे में बीजेपी के लिए उम्मीदवार का चुनाव करना मुश्किल हो गया है. बीजेपी प्रत्येक स्तर पर लगातार मंथन कर रही है. ये भी कहा जा रहा है कि, जातीय समीकरण को देखते हुए शाक्य जाति से किसी नेता को टिकट दिया जा सकता है. कई नामों पर चर्चा भी हो रही है, जिनमें प्रेम सिंह शाक्य, रघुराज शाक्य और ममतेश शाक्य प्रमुख बताए जा रहे हैं.

हालांकि बीजेपी अभी पत्ते खोलने से बच रही है. बीजेपी ने शनिवार को कोर कमेटी की बैठक बुलाई है. इस बैठक में न केवल मैनपुरी बल्कि रामपुर और खतौली उपचुनावों के संभावित चेहरों का पैनल तय हो जाएगा, बाद में दिल्ली हाईकमान इस पर अंतिम मुहर लगाएगा.

अपर्णा यादव का नाम आ रहा सामने
बीजेपी खेमे में अपर्णा यादव का नाम सामने आ रहा है. मुलायम सिंह यादव की बड़ी बहू डिंपल के मुकाबले छोटी बहू अपर्णा यादव को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने गुरुवार को अपर्णा यादव से मुलाकात की. यही नहीं चौधरी के ट्विटर हैंडल से मुलाकात की तस्वीर भी ट्वीट की गई. हालांकि, जानकार यह भी कह रहे हैं कि अपर्णा की प्रत्याशिता के आड़े उनका वो दावा भी आएगा, जिसमें उन्होंने यादव परिवार के खिलाफ चुनाव न लड़ने को लेकर कहा था.

एक धड़ा यह भी मान रहा है कि बीजेपी अपर्णा से मैनपुरी में किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं कर रही है, इसलिए उन्हें अभी मौका मिलना मुश्किल है. इसके अलावा राजनीतिक हलकों में मैनपुरी सीट पर प्रत्याशी न उतारने का विचार भी दौड़ रहा है. ऐसा करके बीजेपी मुलायम सिंह के सम्मान में चुनाव न लड़कर यादव मतदाताओं के बीच एक अच्छा संदेश दे सकेगी, जो 2024 के लोकसभा में भुनाया जा सकेगा. कुछ दिन पहले बलिया के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने अपनी सांसद निधि से मुलायम सिंह यादव के नाम पर सभागार बनाने की घोषणा करके ऐसा ही दांव चला था. 

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