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November 29, 2022


Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट हासिल करने की होड़ तेज होती दिख रही है क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय के पास भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्य में वोट देने के लिए अब कई ‘‘धर्मनिरपेक्ष’’ दलों का विकल्प मौजूद है. पहले के चुनावों में कांग्रेस को गुजरात में मुस्लिम वोटों के लिए इकलौता प्रमुख दावेदार माना जाता था, लेकिन इस बार मुख्य विपक्षी दल अल्पसंख्यक मतदाताओं को रिझाने के लिए छोटे-छोटे दलों से कड़े मुकाबले का सामना कर रहा है. कांग्रेस के सामने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) और कुछ अन्य दलों की चुनौती है.

पिछले विधानसभा चुनाव में केवल तीन मुस्लिम विधायक जीते थे और तीनों कांग्रेस के थे. हालांकि, 2012 विधानसभा चुनाव के मुकाबले यह संख्या बेहतर थी जब महज दो मुस्लिम विधायक जीते थे. राज्य की कुल 6.5 करोड़ की आबादी में मुस्लिमों की संख्या तकरीबन 11 प्रतिशत है और करीब 25 विधानसभा क्षेत्रों में उनकी खासी तादाद है.

कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय के वोट के लिए ये किया

दो दशकों से अधिक समय से गुजरात में राज कर रही बीजेपी को मुस्लिम मतदाताओं की पसंद नहीं माना जाता है. कांग्रेस ने 2017 में राज्य में छह मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे. बीजेपी आमतौर पर किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं देती है. इस साल की शुरुआत में कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय के वोट हासिल करने की कवायद के तौर पर वांकानेर से अपने विधायक मोहम्मद पीरजादा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था. कांग्रेस की गुजरात इकाई के अध्यक्ष जगदीश ठाकोर ने मुस्लिम मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान को दोहराया कि अल्पसंख्यकों को देश के संसाधनों पर ‘‘सबसे पहले दावा’’ जताना चाहिए.

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गुजरात में 30 सीटों पर चुनाव लड़ेगी AIMIM

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए अक्सर गुजरात का दौरा करते रहते हैं. उनकी पार्टी ने कहा था कि वह गुजरात में 30 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और उसने छह प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है. AAP इस समुदाय को लुभाने के लिए चुपचाप काम कर रही है. हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दरियापुर इलाके में रोड शो आयोजित किया था जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है. आप ने अभी तक तीन मुस्लिम उम्मीदवारों के नाम का एलान किया है.

लोकतंत्र में बहुकोणीय चुनावी मुकाबला अच्छी बात 

गैर-राजनीतिक संगठन अल्पसंख्यक समन्वय समिति के संयोजक मुजाहिद नफीस ने कहा, ‘‘2017 में हुए पिछले चुनावों तक मुस्लिमों के पास गुजरात में विकल्प नहीं था क्योंकि दोनों दलों (कांग्रेस और भाजपा) के बीच मुकाबला था, लेकिन अब 2022 के चुनावों में और राजनीतिक दल यहां आ गए हैं. लोकतंत्र में बहुकोणीय चुनावी मुकाबला अच्छी बात है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इससे गुजरात के मुस्लिमों को हल्के में लेने का रवैया खत्म होगा जो अब तक होता था. लोगों के पास अधिक विकल्प होंगे. इस स्थिति में हर राजनीतिक दल हमारे पास आएगा और हमारे वोट मांगेगा.’’

जमालपुर-खड़िया में 65 प्रतिशत मुस्लिम हैं 

दरियापुर से कांग्रेस विधायक गयासुद्दीन शेख का मानना है कि गुजरात में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के साथ रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘गुजरात में स्थिति अलग है. जमालपुर-खाडिया की एक सीट के अलावा अन्य सीटों पर अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों को जीतने के लिए हिंदू वोटों की आवश्यकता है. जमालपुर-खाडिया में स्थानीय आबादी में मुस्लिमों की संख्या 65 प्रतिशत है. दरियापुर में मेरी सीट पर 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. अगर मुझे हिंदुओं से वोट नहीं मिलते तो मैं जीत नहीं पाऊंगा इसलिए राज्य में एआईएमआईएम उम्मीदवारों को हिंदू वोट नहीं मिलेंगे.’’

शेख ने कहा, ‘‘बीजेपी हमें कोई टिकट नहीं देती है. आप की सच्चाई सामने आ गयी है क्योंकि लोगों को पता चल गया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अल्पसंख्यक समुदाय के किसी मुद्दे पर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं. वह (AAP) से ज्यादा सच्चे हिंदू बनना चाहते हैं.’’ उन्होंने कहा कि इसलिए एआईएमआईएम और आप यहां अल्पसंख्यक समुदाय के लिए विकल्प नहीं हैं. वहीं, आप के जंबूसर से उम्मीदवार साजिद रिहान ने कहा, ‘‘यह पहली बार है कि किसी राष्ट्रीय दल ने जंबूसर से मुस्लिम को टिकट दिया है.’’ उन्होंने कहा कि राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय में आप बहुत लोकप्रिय है. उन्होंने कहा कि यहां एआईएमआईएम संगठन बहुत कमजोर है और लोग केवल आप के लिए वोट करेंगे.

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