November 28, 2022


सांकेतिक तस्वीर

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दिल्ली जलबोर्ड में 20 करोड़ के घोटाले के मामले में शनिवार को एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) ने एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोप है कि दिल्ली जलबोर्ड के अधिकारियों ने निजी कंपनी व एक बैंक के साथ मिलकर 20 करोड़ से अधिक रकम की गड़बड़ी की है। मामला संज्ञान में आने के बाद सितंबर माह में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस संबंध में मुख्य सचिव को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। 

मामले में गड़बड़ी की रकम को भी वापस हासिल करने के लिए कहा गया था। उपराज्यपाल के आदेश के बाद मामले की जांच करवाने पर आरोप सही पाए गए। इसके बाद एसीबी को मामला दर्ज करने के लिए कहा गया। एसीबी ने भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के अलावा धोखाधड़ी, अमानत में ख्यानत और आपराधिक षडयंत्र का मामला दर्ज किया है।

जानकारी के अनुसार गड़बड़ी के मामले में पाया गया कि जलबोर्ड ग्राहकों से लिए बिल जलबोर्ड के खाते में भेजने के बजाए एक निजी बैंक के खाते में भेजा गया। जो नियमों का उल्लंघन था। दरअसल जून 2012 में दिल्ली जलबोर्ड ने कॉर्पोरेशन बैंक को तीन साल के लिए पानी का बिल एकत्रित करने के लिए अधिकृत किया था। इसके बाद इसे 2016 और 2017 में जारी रखने के लिए कहा गया। इस दौरान 2019 में गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो तब भी उनके पास यह अधिकार जारी रखा गया। 

आरोप है कि बैंक ने दिल्ली जलबोर्ड के अधिकारियों से मिली भगत कर तय नियमों को ताक में रखकर एक निजी कंपनी को बिल एकत्रित करने व उसे जलबोर्ड के खाते में जमा कराने की जिम्मेदारी दे दी। यह सब उस समय हुआ जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली जलबोर्ड के अध्यक्ष थे। 11 जुलाई 2012 से 10 अक्तूबर 2019 के बीच रुपये जमा कराने में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी हुई थी। 

यह रकम ग्राहकों से तो ले ली गई, लेकिन जलबोर्ड के बैंक खाते में जमा नहीं हुई। इसके बाद भी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने बैंक के अनुबंध को वर्ष 2020 तक के लिए बढ़ा दिया। इस गड़बड़ी में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह प्रत्येक बिल के कमीशन को पांच रुपये से बढ़ाकर छह रुपये कर दिया गया।

कंपनी को नियम में दी गई ढील
नियम के तहत बिल के रूप में वसूली गई रकम को 24 घंटे के भीतर जमा करना होता था। इस नियम में भी कंपनी को ढील दे दी गई। छानबीन के दौरान पता चला कि रकम फेडरल बैंक के एक खाते में जमा हो रही थी। वहां से रकम जलबोर्ड के खाते की जगह एक निजी कंपनी के खाते में जमा हो रही थी। किसी अन्य बैंक के खाते में रकम का जमा होना नियमों का उल्लंघन था। कॉर्पोरेशन बैंक ने इस काम को किया और जलबोर्ड अधिकारियों ने गड़बड़ी पर चुप्पी साधे रखी। इन सब का पता चलने पर एलजी ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था। एसीबी अब मामला दर्ज कर गड़बड़ी का पता लगाने का प्रयास करेगी।

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दिल्ली जलबोर्ड में 20 करोड़ के घोटाले के मामले में शनिवार को एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) ने एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोप है कि दिल्ली जलबोर्ड के अधिकारियों ने निजी कंपनी व एक बैंक के साथ मिलकर 20 करोड़ से अधिक रकम की गड़बड़ी की है। मामला संज्ञान में आने के बाद सितंबर माह में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस संबंध में मुख्य सचिव को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। 

मामले में गड़बड़ी की रकम को भी वापस हासिल करने के लिए कहा गया था। उपराज्यपाल के आदेश के बाद मामले की जांच करवाने पर आरोप सही पाए गए। इसके बाद एसीबी को मामला दर्ज करने के लिए कहा गया। एसीबी ने भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के अलावा धोखाधड़ी, अमानत में ख्यानत और आपराधिक षडयंत्र का मामला दर्ज किया है।

जानकारी के अनुसार गड़बड़ी के मामले में पाया गया कि जलबोर्ड ग्राहकों से लिए बिल जलबोर्ड के खाते में भेजने के बजाए एक निजी बैंक के खाते में भेजा गया। जो नियमों का उल्लंघन था। दरअसल जून 2012 में दिल्ली जलबोर्ड ने कॉर्पोरेशन बैंक को तीन साल के लिए पानी का बिल एकत्रित करने के लिए अधिकृत किया था। इसके बाद इसे 2016 और 2017 में जारी रखने के लिए कहा गया। इस दौरान 2019 में गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो तब भी उनके पास यह अधिकार जारी रखा गया। 

आरोप है कि बैंक ने दिल्ली जलबोर्ड के अधिकारियों से मिली भगत कर तय नियमों को ताक में रखकर एक निजी कंपनी को बिल एकत्रित करने व उसे जलबोर्ड के खाते में जमा कराने की जिम्मेदारी दे दी। यह सब उस समय हुआ जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली जलबोर्ड के अध्यक्ष थे। 11 जुलाई 2012 से 10 अक्तूबर 2019 के बीच रुपये जमा कराने में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी हुई थी। 

यह रकम ग्राहकों से तो ले ली गई, लेकिन जलबोर्ड के बैंक खाते में जमा नहीं हुई। इसके बाद भी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने बैंक के अनुबंध को वर्ष 2020 तक के लिए बढ़ा दिया। इस गड़बड़ी में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह प्रत्येक बिल के कमीशन को पांच रुपये से बढ़ाकर छह रुपये कर दिया गया।

कंपनी को नियम में दी गई ढील

नियम के तहत बिल के रूप में वसूली गई रकम को 24 घंटे के भीतर जमा करना होता था। इस नियम में भी कंपनी को ढील दे दी गई। छानबीन के दौरान पता चला कि रकम फेडरल बैंक के एक खाते में जमा हो रही थी। वहां से रकम जलबोर्ड के खाते की जगह एक निजी कंपनी के खाते में जमा हो रही थी। किसी अन्य बैंक के खाते में रकम का जमा होना नियमों का उल्लंघन था। कॉर्पोरेशन बैंक ने इस काम को किया और जलबोर्ड अधिकारियों ने गड़बड़ी पर चुप्पी साधे रखी। इन सब का पता चलने पर एलजी ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था। एसीबी अब मामला दर्ज कर गड़बड़ी का पता लगाने का प्रयास करेगी।





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