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CJI Remark | CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा- ‘हम जो काम कर रहे वो 99 फीसदी लोगों तक नहीं पहुंच रहा’, पीएम मोदी ने भी कही ‘ये’ बात


CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा- ‘हम जो काम कर रहे वो 99 फीसदी लोगों तक नहीं पहुंच रहा’, पीएम मोदी ने भी कही ‘ये’ बात

नई दिल्ली: भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) ने शनिवार (21 जनवरी) को मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा कि, प्रत्येक भारतीय भाषा में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसलों की प्रतियां उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि, नागरिकों तक उनकी भाषा में पहुंचना होगा। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी सीजेआई चंद्रचूड़ के भाषण के एक अंश का वीडियो ट्वीट करते हुए उनकी बात से सहमति जताई है। 

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार,  सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मुंबई में ‘बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा’ की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में यह कहा। अपने भाषण में चीफ जस्टिस ने तकनीकी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।  

हर फैसले की अनुवादित प्रतियों को हर भारतीय भाषा में उपलब्ध कराना: CJI

बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा की और से आयोजित  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ”हमारे मिशन का अगला कदम सुप्रीम कोर्ट के हर फैसले की अनुवादित प्रतियों को हर भारतीय भाषा में उपलब्ध कराना है। जब तक हम अपने नागरिकों तक उस भाषा में नहीं पहुंचते जिसे वे समझ सकते हैं, हम जो काम कर रहे हैं वो 99 फीसदी लोगों तक नहीं पहुंच रहा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की सराहना 

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के भाषण की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। सीजेआई के बात पर सहमति जताते हुए उन्होंने ट्वीट किया कि, ”हाल में एक समारोह में, माननीय भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने क्षेत्रीय भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने इसके लिए तकनीक के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया। यह एक सराहने योग्य  सोच है, जिससे कई लोगों, विशेषकर युवाओं को मदद मिलेगी।”

 

साथ ही पीएम मोदी ने दूसरे ट्वीट में लिखा, ”भारत में कई भाषाएं हैं, जो हमारी सांस्कृतिक जीवंतता को जोड़ती हैं। केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए बहुत से प्रयास कर रही है, जिसमें इंजीनियरिंग और मेडिसिन जैसे विषयों को मातृभाषा में पढ़ने का विकल्प देना शामिल है।”





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