लव हार्मोन में है कारामाती शक्ति, हार्ट की इंज्युरी को भी कर सकता है ठीक, नई रिसर्च में खुलासा » Br Breaking News
December 6, 2022
लव हार्मोन में है कारामाती शक्ति, हार्ट की इंज्युरी को भी कर सकता है ठीक, नई रिसर्च में खुलासा


हाइलाइट्स

हार्ट अटैक के बाद हार्ट की अंदरूनी दीवाल पर चोट लगती है तो हार्ट की दीवाल की हेल्दी कोशिकाएं मर जाती हैं
ऑक्सीटोसिन हृदय की बाहरी परत से प्राप्त स्टेम कोशिकाओं को इसकी मध्य परत में स्थानांतरित करता है

Love hormone and heart attack: क्या आपने लव हार्मोन का नाम सुना है. लव हार्मोन यानी ऑक्सीटोसिन हार्मोन. इसे कीप हैप्पी हार्मोन भी कहा जाता है. इसे हैप्पी हार्मोन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस हार्मोन के प्रभाव के कारण हमें खुशी और आनंद मिलता है. ऑक्सीटोसिन हार्मोन के कई और काम हैं. यह एक-दूसरे के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना का एहसास जगाता है. दो व्यक्तियों के बीच प्रेम के बंधन को मजबूत करता है. कला और संगीत का आनंद लेने के लिए भी इस हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका है. ऑक्सीटोसिन के प्रभाव से यौन संबंधों में आनंद मिलता है. महिलाओं में दूध के उत्पादन और गर्भाशय के संकुचन को नियंत्रित करता है. इसके अलावा पुरुषों में टेस्टेस्टोरॉन हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाता है. इतने सारे महत्वपूर्ण काम के बाद वैज्ञानिकों ने अब लव हार्मोन से हार्ट अटैक के बाद हार्ट की कोशिकाओं को दोबारा सही करने का तरीका खोजा है.

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खोज से लाखों लोगों को बचाया जा सकता है
न्यूजमेडिकल के मुताबिक मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि जेब्राफिश और मानव सेल कल्चर में ऑक्सीटोसिन का एक और महत्वपूर्ण काम है. यह हृदय की बाहरी परत (एपिकार्डियम) से प्राप्त स्टेम कोशिकाओं को इसकी मध्य परत (मायोकार्डियम) में स्थानांतरित करने के लिए उत्तेजित करता है और वहां कार्डियोमायोसाइट्स में विकसित हो जाता है. कार्डियोमायोसाइट्स हृदय की मांसपेशी कोशिकाएं हैं जो हृदय संकुचन उत्पन्न करती हैं. इस खोज से एक दिन हार्ट अटैक के बाद हार्ट की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को दोबारा विकसित किया जा सकता है. दरअसल, जब किसी एक्सीडेंट या हार्ट अटैक के बाद हार्ट की अंदरूनी दीवाल पर चोट लगती है तो हार्ट की दीवाल की हेल्दी कोशिकाएं मर जाती हैं. हृदय के पास खुद के क्षतिग्रस्त या मृत हो चुके उत्तकों को ठीक करने या उसे बदलने की बेहद सीमित क्षमता है. लेकिन रिसर्च में जेब्राफिश में ऑक्सीटोसिन के फंक्शन के आधार पर दावा किया गया कि ऑक्सीटोसिन के प्रभाव के कारण एक दिन हार्ट के मीडिल लेयर की कोशिकाओं को भी दोबारा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो लाखों लोगों को हर साल हार्ट अटैक के बाद होने वाली जटिलताओं से बचाया जा सकता है.

जेब्राफिश में हार्ट की मरम्मत करने की अद्भुत क्षमता
शोधकर्ताओं ने बताया कि ऑक्सीटोसिन हार्ट के अंदर एपीकार्डिएम की मैच्योर कोशिकाओं को जननी कोशिकाएं या स्टेम सेल की तरह काम करने के लिए सक्रिय करता है. इससे क्षतिग्रस्त हार्ट की कोशिकाओं की मरम्मत हो जाएगी और हार्ट पुनः स्वस्थ्य हो जाएगा. शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि छोटी सी मछली जेब्राफिश में अपने अंगों को दोबारा विकसित करने की अद्भुत क्षमता होती है. वह ब्रेन, रेटिना, हड्डी, स्किन और आंतरिक अंगों के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद इनकी मरम्मत खुद ही कर लेती है. दरअसल, शिकारी मछलियों को जेब्राफिश के अंगों को काटकर खाने में मजा आता है लेकिन अगर जेब्राफिश का चौथाई भाग भी कट जाता है तो इसकी मरम्मत वह खुद कर लेती है. चाहे वह हार्ट या ब्रेन ही क्यों न हो. इसमें कार्डियोमायोसाइट्स का आंशिक रूप से पूरे अंगों में प्रसार हो जाता है. इसके लिए EpiPCs के कारण संभव होता है.

20 गुना बढ़ जाती है आरएनए की क्षमता
EpiPCs यानी एपीकार्डिएम डिराइव्ड प्रोजीनेटर सेल्स. यह स्टेम सेल है जिसकी सक्रियता से न सिर्फ हृदय की दीवाल की मरम्मत हो सकती है बल्कि हृदय के अंदर की पूरी कोशिकाओं को दोबारा से विकसित कर सकती है. लेकिन सवाल यह है कि जेब्राफिश EpiPCs की मदद से हृदय की इतनी कुशलता से मरम्मत कैसे करती हैं? क्या हम जेब्राफिश में एक ‘मैजिक बुलेट’ खोज सकते हैं जो कृत्रिम रूप से मनुष्यों में EpiPCs के उत्पादन को बढ़ा दे? वैज्ञानिकों ने कहा कि यह मैजिक बुलेट ऑक्सीटोसिन ही है. शोधकर्ताओं ने पाया कि चोट लगने के कारण क्षतिग्रस्त हार्ट की मरम्मत जेब्राफिश तीन दिनों के अंदर ही कर लेती है. क्योंकि ऑक्सीटोसिन के प्रभाव के कारण मैसेंजर आरएनए 20 गुना बढ़ जाता है.

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