November 28, 2022
ईवनिंग शिफ्ट में काम करने से मेंटल हेल्थ पर पड़ता है बुरा असर, नशे की लत के साथ बढ़ सकता है तनाव


Negative Effects of Working at Evening And Night Shift: सामान्य तौर पर हमारे जीवन में दिन का समय काम करने के लिए और रात का समय सोने के लिए होता है. लेकिन, कई ऐसी जगहें हैं जहां पर कर्चारियों को ईवनिंग शिफ्ट या फिर रात के समय काम करना होता है. वैसे तो रात में काम कम होता है लेकिन यह काम करने की यह टाइमिंग हेल्थ के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकती है. एक्सपर्ट की मानें तो ईवनिंग और नाइट शिफ्ट में काम करने की वजह से हृदय, पाचन, तनाव संबंधी कई तरह की शारीरिक दिक्कतें हो सकती हैं.

ओनली माय हेल्थ की खबर के अनुसार ईवनिंग शिफ्ट में काम करने वालों को लेकर हाल ही एक अध्ययन हुआ है. अध्ययन में यह पता चला कि अवसाद, तनाव, एंग्जायटी जैसी समस्या क्रोनोटाइप (रात में जागने वाले) लोगों में होने की संभावना अधिक पाई जाती है. अच्छी हेल्थ और हैप्पी लाइफ के लिए सुबह जल्दी उठना बेहतर माना जाता है और एक्सपर्ट भी इस बात को मानते हैं कि सुबह जल्दी उठने से डिप्रेशन जैसी बीमारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है. लेकिन, जब आप ईवनिंग या फिर नाइट शिफ्ट में काम करते हैं तो सुबह जल्दी नहीं उठ पाते और कई तरह की बीमारियां आपको घेरने लगती हैं.

अपने शोध में चियारा लुसिफोरा, जियोर्जियो एम. ग्रासो, माइकल ए. नित्शे, जियोवन्नी डी’इटालिया, मौरो सोर्टिनो, मोहम्मद ए. सालेहिनेजाद, एलेसेंड्रा फालज़ोन, एलेसियो एवेनेंटी, और कार्मेलो एम. विकारियो सहित शोधकर्ताओं ने क्रोनोटाइप और डर के बीच के संबंध का विश्लेषण किया. एक्सपर्ट के अनुसार इवनिंग और नाइट शिफ्ट में काम करने का हमारे मेंटल हेल्थ पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है.

World Pneumonia Day: जानलेवा भी साबित हो सकता है निमोनिया, यहां जानें इसके कारण और लक्षण

दो समूहों से मिलने वाले निष्कर्ष अध्ययनों की पुष्टि करते हैं जो शाम के समय काम करते हैं उनमें पीटीएसडी और चिंता विकारों के बीच उच्च संबंध मिलते हैं. दो समूहों के निष्कर्षों ने संकेत दिया कि सुबह के समय काम करने वाले क्रोनोटाइप लोगों की तुलना में शाम के क्रोनोटाइप वाले प्रतिभागियों में पीटीएसडी और चिंता विकार की संभावना कई गुना अधिक थी.

ईवनिंग शिफ्ट में काम करने के नेगेटिव प्रभाव

– नींद में कमी होना
– स्तन कैंसर का खतरा बढ़ना
– दिल के दौरे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है
– डिप्रेशन का खतरा बढ़ना
– वर्कप्लेस में चोट लगने का खतरा बढ़ना
– नाइट शिफ्ट से मेटाबॉलिज्म में बदलाव
– मोटापे और मधुमेह में खतरा बढ़ना

मेटाबॉलिक सिड्रोम का जोखिम
रात के समय नींद न पूरी होने की वजह से मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है. ठीक से नींद न पूरी होने की वजह से थकान और चिड़चिड़ापन की समस्या बढ़ने लगती है. एक्सपर्ट के अनुसार रात में देर तक जागने से सर्कैडियन रिदम बुरी तरह से प्रभावित होता है जिससे हमारे व्यवहार में बदलाव आने लगता है. शोध बताते हैं कि रात में काम करने का सबसे ज्यादा प्रभाव मेटाबॉलिक सिंड्रोम का जोखिम बढ़ जाता है और स्लीप साइकिल डिस्टर्बेंस होने की वजह से मोटापा की संभावना भी करीब 25 प्रतिशत बढ़ जाती है. इसके साथ ही क्रोनोटाइप वाले लोगों में धूम्रपान और नशे की लत बढ़ने की भी संभावना बढ़ जाती है.

Tags: Anxiety, Lifestyle, Mental health



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *